सोमवार, 25 अगस्त 2025

बारिश पर कुंडली छंद

 




बादल की पायल पहन, बरखा करती नृत्य

बूँद-बूँद रौने झरें, हुई धरा कृतकृत्य

हुई धरा कृतकृत्य, पहन कर हरियल साड़ी

सुर मिला सखी संग, खिली स्वर्णिम फुलवाड़ी

जीवन का विस्तार, सृजनकर्ता का दल-बल

बरखा-धरा प्रमाद, हेतु बन जाता बादल

वंदना बाजपेयी

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